Posts

Showing posts with the label क्षत्रिय संस्कार/परम्पराएं

दुल्ला भट्टी एक मुस्लिम राजपूत यौधा जिसकी याद में लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है (DULLA BHATI,A MUSLIM RAJPUT WARRIOR)

Image
DULLA BHATI, A GREAT MUSLIM RAJPUT WARRIOR Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास लोहड़ी का पर्व एक मुस्लिम राजपूत योद्धा दुल्ला भट्टी कि याद में पुरे पंजाब और उत्तर भारत में मनाया जाता है , लोहड़ी की शुरुआत के बारे में मान्यता है कि यह राजपूत शासक दुल्ला भट्टी द्वारा गरीब कन्याओं सुन्दरी और मुंदरी की शादी करवाने के कारण शुरू हुआ है. दरअसल दुल्ला भट्टी पंजाबी आन का प्रतीक है. पंजाब विदेशी आक्रमणों का सामना करने वाला पहला प्रान्त था  ।ऐसे में विदेशी आक्रमणकारियों से यहाँ के लोगों का टकराव चलता था . दुल्ला भट्टी का परिवार मुगलों का विरोधी था.वे मुगलों को लगान नहीं देते थे. मुगल बादशाह हुमायूं ने दुल्ला के दादा सांदल भट्टी और पिता फरीद खान भट्टी का वध करवा दिया. दुल्ला इसका बदला लेने के लिए मुगलों से संघर्ष करता रहा. मुगलों की नजर में वह डाकू था लेकिन वह गरीबों का हितेषी था. मुगल सरदार आम जनता पर अत्याचार करते थे और दुल्ला आम जनता को अत्याचार से बचाता था. दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उस समय पंजाब में स्थान स्थान पर हिन्दू लड़कियों को यौन गुलामी क...

गणगौर पर्व--GANGAUR FESTIVAL ,THE INTEGRAL PART OF RAJPUTANA CULTURE

Image
गणगौर नामक त्यौहार राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरयाणा, गुजरात के कई क्षेत्रो में बहुत लोकप्रिय है लेकिन राजपूत स्त्रियों के लिये इसका विशेष महत्व है और राजपूत समाज में यह पर्व बहुत धूम धाम से मनाया जाता है । Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास गणगौर पर्व - मित्रो राजपूत समाज अपनी विशेष रीती रिवाज और संस्कृति के लिये जाना जाता है। राजपूत हिन्दू समाज के सिरमौर है इसलिये बाकी जातीया भी राजपूत संस्कृति को आदर्श के रूप में देखती हैँ। राजपूतो में साल भर में कई तरह के त्यौहार मनाते हैँ और राजपूतो में इनको विशेष तरीको और शानो शौकत के साथ मनाया जाता है। ऐसे ही एक गणगौर नामक त्यौहार के महत्व से आपका परिचय आज कराएंगे जो राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरयाणा, गुजरात के कई क्षेत्रो में बहुत लोकप्रिय है लेकिन राजपूत स्त्रियों के लिये इसका विशेष महत्व है और राजपूत समाज में यह पर्व बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। गणगौर एक प्राचीन त्यौहार है जिसमे शिव जी के अवतार के रूप में गण(ईसर) और पार्वती के अवतार के रूप में गौरा माता का पूजन किया जाता है। यह होली के तीन बाद से शुरू होता है और 18 दिन तक चलता है जिसमे ...

क्षत्रिय संस्कार एवं परम्पराएं,क्षत्रियत्व (THE GREAT CULTURE AND TRADITIONS OF KSHATRIYAS)

Image
क्षत्रियत्व भाग--1  क्षत्रियत्व भाग--2 Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास क्षत्रियत्व ......जरूर पढ़े और शेयर करे  1) राजपूतो में पहले सिर के बाल बड़े रखे जाते थे जो गर्दन के नीचे तक होते थे युद्ध में जाते समय बालो के बीच में गर्दन वाली जगह पर लोहे की जाली डाली जाती थी और वहा विषेस प्रकार का चिकना प्रदार्थ लगाया जाता था (कुछ लोग आकड़े का दूध भी लगते थे ) इससे तलवार से गर्दन पर होने वाले वार से बचा जा सके 2) युद्ध में धोखे का संदेह होने पर घुसवार अपने घोड़ो से उतर कर जमीनी युद्ध करते थे 3) मध्य काल में देवी और देव पूजा होती थी जंग में जाने से पूर्व राजपूत अपनी कुलदेवियो की पूजा अर्चना करते थे जो ही शक्ति का प्रतिक है मेवाड़ के सिसोदिया एकलिंग जी की पूजा करते 4) हरावल - राजपूतो की सेना में युद्ध का नेतृत्व करने वाली टुकड़ी को हरावल सेना कहा जाता था जो सबसे आगे रहती थी कई बार इस सम्माननीय स्थान को पाने के लिए राजपूत आपस में ही लड़ बैठते थे इस संदर्भ में उन्टाला दुर्ग वाला चुण्डावत शक्तावत किस्सा प्रसिद्ध है 5) किसी बड़े जंग में जाते समय या नय प्रदेश की लालसा में जाते समय रा...

Sati Roop Kanwar (1987,Deorala,Sikar,Rajasthan)

Image
                        भारतवर्ष की अंतिम सती   क्षत्राणी रूपकंवर                                  Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास Sati Roop Kanwar (1987,Deorala,Sikar,Rajasthan) सती" जिसका नाम सुनते ही रूह काँप जाती है, बदन का रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो जाता है, दिल में एक अलग तरह की सनसनी पैदा हो जाती है, हम यह सोच भी नहीं सकते है कुछ अरसे पहले ही 4 सितम्बर 1987 को रूप कँवर पत्नी माल सिंह शेखावत कि चिता पर जिन्दा बैठकर सती हुयी और मिथक/किवदन्ती है कि उस वक़्त चिता को ज्योत हाथो से नही दीगई थी असमान से चुनरी उठी और ज्योत लग गयी देवराला, जिला सीकर सती हुए थी. अपने पति माल सिंह जी शेखावत (24) के निधन के बाद रूप कँवर (18 ) ने सती होने का सोचा और इनके पीछे कोई संतान नहीं थी, इन्हे राजस्थान और भारत वर्ष कि आखिरी सती माना जाता है सती होने के बाद आपके परिवार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी सरकार ने 39 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा राजस...