JADEJA RAJPUTS AND THE BATTLE OF TAMACHAN(सम्वत 1639)
जाम सत्रसाल उर्फ़ सता जी और तमाचन का युद्ध Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास जाम सत्रसाल उर्फ़ सता जी -------जाम सत्रसाल उर्फ़ सता जी और तमाचन का युद्ध(सम्वत 1639)--------- हमने देखा की कैसे मजेवड़ी के मैदान में सम्वत 1633 में जाडेजा राजपुतो ने भान जी दल जाडेजा और जैसा जी वजीर के नेत्रत्व में मुग़ल लश्कर को पस्त कर दिया था | भान जी दाल जडेजा ने मजेवाड़ी में अकबर के शिविर से 52 हाथी, 3530 घोड़े और पालकियों को अपने कब्जे में लिया था और मुगल सेनापति मिर्जा खान तथा अकबर सौराष्ट्र से भाग खड़े हुए थे. सरदार मिर्ज़ा खान ने अहमदाबाद जाकर सूबेदार शाहबुदीन अहमद खान को बताया की किस तरह जाम साहिब की फ़ौज ने उनके लश्कर का बुरी तरह नाश कर दिया और वो अपनी जान बचाकर वहा से भाग निकला | खुद अकबर भी इस हार से बहुत नाराज था | अब मुगल सेना नवानगर को नष्ट करने के प्रयोजन पर लग गई और जल्दी ही कुछ वर्ष बाद सम्वत 1639 में शाहबुदीन ने खुरम नामके सरदार को एक प्रचंड सैन्य के साथ जामनगर पर चढाई करने के लिए भेजा | मुग़ल सूबे का बड़ा लश्कर जामनगर(नवानगर) के ऊपर आक्रमण करने के लिए आ रह...