Posts

Showing posts with the label PARMAR

मौर्य क्षत्रिय राजपूत वंश (Maurya dynasty)

Image
सूर्यवंशी मौर्य क्षत्रिय राजपूत वंश की गौरव गाथा------- मौर्य वंश से जुडी भ्रांतियों का तर्कपूर्ण खण्डन टीम rajputana soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास द्वारा, जरूर पढ़ें और अधिक से अधिक शेयर भी करें।। ================================ मौर्यो के रघुवंशी क्षत्रिय होने के प्रमाण-------- महात्मा बुध का वंश शाक्य गौतम वंश था जो सूर्यवंशी क्षत्रिय थे।कौशल नरेश प्रसेनजित के पुत्र विभग्ग ने शाक्य क्षत्रियो पर हमला किया उसके बाद इनकी एक शाखा पिप्लिवन में जाकर रहने लगी। वहां मोर पक्षी की अधिकता के कारण मोरिय कहलाने लगी। बौद्ध रचनाओं में कहा गया है कि ‘नंदिन’(नंदवंश) के कुल का कोई पता नहीं चलता (अनात कुल) और चंद्रगुप्त को असंदिग्ध रूप से अभिजात कुल का बताया गया है। चंद्रगुप्त के बारे में कहा गया है कि वह मोरिय नामक क्षत्रिय जाति की संतान था; मोरिय जाति शाक्यों की उस उच्च तथा पवित्र जाति की एक शाखा थी, जिसमें महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। कथा के अनुसार, जब अत्याचारी कोसल नरेश विडूडभ ने शाक्यों पर आक्रमण किया तब मोरिय अपनी मूल बिरादरी से अलग हो गए और उन्होंने हिमालय के एक सुरक्षित स्थान में जाकर...

हिमाचल प्रदेश का निर्माण करने वाले डॉ यशवंत सिंह परमार

Image
हिमाचल प्रदेश के संस्थापक और प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार जी की संघर्ष गाथा------- आज हम आपको जानकारी देंगे उस महान नेता की जिसने हिमाचल प्रदेश की स्थापना और उन्नति में अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया।वो थे हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉक्टर यशवन्त सिंह परमार जी।।।। प्रारम्भिक जीवन---- 4 अगस्त, 1906 के दिन सिरमौर रियासत के पच्छाद क्षेत्र में ग्राम चन्हालग निवासी शिवानन्दसिंह परमार के घर जन्मे बालक यशवंत ने आगे चलकर अपने सुकृतों के बूते अपने नाम को सार्थक किया। स्नातक (आनर्स), फिर स्नातकोत्तर तथा विधि स्नातक जैसी उच्च शिक्षा उत्तीर्ण करने के अलावा लखनऊ विवि. से समाज शास्त्र में 1944 ई. में पी.एचडी. की प्रतिष्ठित उपाधि ग्रहण की। इसी बीच इन्हें सिरमौर रियासत के सब-जज और बाद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति मिल गई; लेकिन रियासत के विरुद्ध ही एक क्रांतिकारी एवं निर्भीक निर्णय पारित करने के कारण 1941 में सात वर्ष के लिए निष्कासित कर दिये गये। राजनितिक जीवन और संघर्ष गाथा---- निष्कासन की समाप्ति के बाद शिमला में वकालत करते हुए रियासती शासन के विरुद्ध प्रजामंडल आन्द...

जब एक तीतर पक्षी को बचाने के लिए सैंकड़ो सोढा-परमार राजपूतो ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया

Image
जब एक तीतर पक्षी को बचाने के लिए सोढा-परमार राजपूतो ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया...!!! एक ऐसी अनोखी घटना जिसमे एक क्षत्राणी अपने वीर पुत्र की चिता के साथ सती हुई। “शरणे आयो सोपे नहीं राजपुतारी रीत, धड गिरे पर छोड़े नहीं खत्री होय खचित” अंग पोरस, रसणे अमृत, भुज परचो रजभार  सोढा वण सूजे नहीं होय नवड दातार...|| १ || (सोढा-परमार राजपूतो के हाथ से जो दान मिलता हे, उनकी जीभ से जो अमृत बरसता हे और उनकी भुजाओ में जो ताकत होती हे वैसे और किसी में नहीं होता) बात हे विक्रम सवंत 1214 की जब सिंध के थरपारकर में सतत सात साल तक बारिश न होने की वजह से अकाल की स्थिति पैदा हो गई थी जिसकी वजह से वहा के परमार राजा रतनसिंह के बेटे लखधीरसिंह अपनी प्रजा और गोचर के साथ पानी की खोज में सौराष्ट्र के वढवान रियासत में मुली गाव के पास आकर रुके | वहा के उस समय के राजवी विशणदेव वाघेला थे | लखधीरसिंह ने उनसे यहाँ पे रुकने के लिए और अपनी गायो के लिए घास चराने की मांग की, विशणदेव वाघेला अति उदार मन के होने के कारण उन्होंने गायो को चराने के साथ साथ वहा आजू-बाजु की सभी ज़मीन उनको रहेने के लिए दे दी |     ...

1857 की क्रांति के महानायक कुंवर सिंह की महागाथा (VEER KUNVAR SINGH,THE GREATEST FREEDOM FIGHTER)

Image
VEER KUNVAR SINGH,THE GREATEST FREEDOM FIGHTER Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास ===अंग्रेज़ो विरुद्ध स्वाधीनता संग्राम में राजपूतो का योगदान- भाग-3 === मित्रो जैसा कि सभी को पता है कि 1857 के संग्राम में राजपूत अंग्रेज़ो के विरुद्ध संघर्ष में सबसे आगे रहे थे। हमेशा की तरह राजपूतो ने इस संग्राम का नेतृत्व किया था। 1857 का संग्राम, सबसे पहले मुख्यत: एक सैनिक विद्रोह था जिसमे अधिकतर अवध, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के राजपूत सैनिक शामिल थे। इन सैनिको से प्रेरणा लेकर ही इन क्षेत्रो में आम जनता ने अंग्रेज़ो के विरुद्ध बगावत करी। अवध में तो ये बगावत सबसे भीषण थी और समाज के लगभग हर वर्ग ने संग्राम में भाग लिया जिसका नेतृत्व राजपूतो ने किया। अवध, पूर्वांचल और पश्चिम बिहार के राजपूतो ने संग्राम में सबसे सक्रीय रूप से भाग लिया जिसके परिणाम स्वरुप संघर्ष समाप्ति के बाद अंग्रेज़ो ने उनका दमन किया। सिर्फ अवध में ही एक साल के अंदर राजपूतो की 1783 किलों/गढ़ियों को ध्वस्त किया गया जिनमे से 693 तोप, लगभग 2 लाख बंदूके, लगभग 7 लाख तलवारे, 50 हजार भाले और लगभग साढ़े 6 लाख अन्य तरह के हथियारों क...

सरदार बाज सिंह पंवार ,खालसा राज के पहले गवर्नर

Image
====== सिक्ख धर्म के उत्थान में राजपूतों का योगदान पार्ट 3 ======= Rajputana Soch  राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास (See English translation below; a special thanks to Sardar Harshveer singh ji for this post ) खालसा राज के पहले शाशक- सरदार बाज़ सिंह परमार Sardar baj singh parmar ,first governor of khalsa raj----- मित्रों जैसा के आप सभी लोग जानते है हमने सिख धर्म के उत्थान में देश के क्षत्रियों द्वारा दिए गए योगदानों को लेकर एक पोस्ट की श्रंखला चलाई हुई है। इस श्रृंखला के तहत हमारा उद्देश्य वीर सिख राजपूत योद्धाओं के बलिदान से लोगो को अवगत कराना है। इस श्रृंखला के तहत हम पिछली पोस्ट्स में सरदार बज्जर सिंह राठौर जो की गुरु गोविंद सिंह जी के शस्त्र विद्या के गुरु थे और वीर बंदा बहादुर मन्हास के बारे में बता चुके है। आज बारी है राव सरदार बाज सिंह जी पुआर (परमार) की जो खालसा राज के प्रथम गवर्नर (राज्यपाल) थे। ये किसी भी क्षेत्र पर शाशन करने वाले पहले सिक्ख शाशक बने जब इन्हें सरहिंद का सूबेदार बनाया गया। सरदार बाज सिंह जी पुआर (परमार) जिन्हे बाज बहादुर क...