Posts

Showing posts with the label Rajputs

भारतीय क्रिकेट के पितामहः महाराजा जाम साहेब रणजीत सिंह जी जाडेजा

Image
      ===टेस्ट क्रिकेट और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले प्रथम भारतीय===                        आज हम आपका परिचय उस हस्ती से करवाएंगे जिसे भारतीय क्रिकेट का पितामहः कहलाने का गौरव प्राप्त है और साथ ही भारत के घरेलू क्रिकेट सत्र के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया है। गुजरात में नवानगर रियासत के महाराजा रहे जाम साहेब रणजीत सिंह जी जाडेजा पहले भारतीय थे जिन्होंने प्रोफेशनल टेस्ट मैच और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उन्हें अब तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजो में से एक माना जाता है। क्रिकेट की दुनिया में कई नए शॉट लाने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। क्रिकेट की दुनिया में लेग ग्लांस शॉट का आविष्कार और उसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। साथ ही बैकफुट पर रहकर अटैक और डिफेन्स, दोनों तरह के शॉट लगाने का कारनामा भी दुनिया के सामने सर्वप्रथम वो ही लेकर आए। रणजीत सिंह जी का जन्म 10 सितम्बर 1872 को नवानगर राज्य के सदोदर नामक गाँव में जाडेजा राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता का...

YADUVAMSHI KSHATRIYA RAJPUTS

Image
Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास YADUVAMSHI RAJPUTS 1st Century AD, Yaduvamshi Rajput empire of Samrath Gajasena was the bulwark of Aryas against the thieving mleccha empires of Khushana who ruled from Khorasan and Indo-Greek traitors who betrayed Aryavart and its culture by adopting Hellenism. Khushanas had assembled 400,000 horses along with endless infantry and formidable elephant units. On the advice of Goddess Jwala, Gajasena built a fortress on the site of Ghazni. Despite the overwhelming number of the enemies the great  scion of Krishna's blood decided to fight. Thursday, the 13th of Magha was chosen as the auspicious day for the battle. During the battle the Khushana king died. Indo-Greeks lead the command and their allied troops marched like the waves of ocean, just to be butchered at the hands of Gajasena's brave soldiers. After the victory- on 3rd of Baisakh, 3008 Dharmaraja Yudhisthira Samvat, Samrath Gajasena ascended on the throne of Ghazni as a vic...

NIMIVANSHI RAJPUTS THE DYNASTY OF RAJANYA JANAK AND MAA SITA

Image
RAPUTANA SOCH OR KSHATRIYA ITIHAS NIMIVANSH THE DYNASTY OF RAJA JANAK AND MAA SITA  === निमि वंश(Nimivanshi rajputs)=== ~~माता सीता का वंश~~ क्षत्रिय समाज में भगवान राम के वंशजो से सभी परिचित हैं। लेकिन बहुत कम लोगो को निमि वंश के बारे में जानकारी है जिसमे माता सीता का जन्म हुआ था। निमि वंश के क्षत्रिय राजपूत आज भी बिहार राज्य के मिथिला और उसके आसपास के क्षेत्र में मिलते हैं।  गौत्र- वशिष्ठ, कश्यप, वत्स प्रवर- वशिष्ठ, अत्रि, सांकृति वेद- यजुर्वेद कुलदेवी- चंडिका नदी- कोसी प्राचीन गद्दी- मिथिला निमिवंश वैवस्वत मनु की एक संतान निमि के वंशज हैं। महाराजा निमि के ज्येष्ठ पुत्र का नाम मिथि था। मिथि ने अपने नाम से मिथिला नगरी बसाकर उसे अपनी राजधानी बनाया। मिथि पराक्रमी शासक होने के साथ साथ बहुत बड़े विद्वान् भी थे। इस वजह से उनकी उपाधि जनक पड़ी और उनके बाद मिथिला के सभी शासको की उपाधि जनक हो गई। मिथिला को जनकपुरी भी कहते हैँ जो अब नेपाल में पड़ता है। महाराज निमि नेपाल के भी शाशक थे। कहा जाता है इसीलिए पहले नेपाल को निमिपाल कहते थे, जो कालांतर में नेपाल हो गया।  निमि की 49वीं पीढ़ी म...

LEGENDARY WARRIOR THAKUR MOHAN SINGH MADHAD

Image
====हुतात्मा ठाकुर मोहन सिंह मडाड==== (यादगार अहमद की तवारीखें-सलतीने-अफगाना; इलियट एंड डौसन भाग 5; बाबरनामा, सर एडीलवर्ट टेबोलेट का अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित) ठाकुर मोहन सिंह मडाड का इतिहास साहस और शौर्य की परकाष्ठा है और भारत के इतिहास में जालौर के सोनीगारा चौहान वीरमदेव के बाद क्षत्रियों का शौर्य प्रदर्शित करने वाले इस दुर्लभ वीर पुरुष की जितनी प्रशंशा की जाय वह कम ही होगी क्योकि अल्प और सीमित साधन रहते हुए इन्होंने उस बाबर की समुद्र सी लहराती प्रबल सत्ता को चुनौती दी उसके अह्निर्श विजयों से उत्तर भारत थर थर काँप रहा था, इन्होंने उस महाबली बाबर को भी अपनी तलवार का पानी पिला कर छोड़ा। यह घटना है हिजरी 936 की है| उस समय बाबर लाहौर में था और आगरा जाने की तैयारी में था। बाबर ने लाहौर से आगरा जोन के लिए प्रस्थान किया। सरहिंद पहुँचने पर उसे समाना के काजी ने उससे मुलाकात कर बताया की कैथल के मोहन सिंह मडाड (मंडहिर) नामक राजपूत ने उसकी इमलाक (जागीर) पर हमला करके उसे लूटा पाटा और जलाया और उसके बेटे को मार डाला। काजी की बात सुन के आग बबूला हुए बाबर ने फ़ौरन ही तीन हजार घुड़सवारों के साथ अली कुली ...