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आलम सिंह चौहान नचणा जी,वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा(Alam singh chauhan nachna, great sikh rajput warrior

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सिक्ख धर्म की स्थापना में राजपूतों का योगदान भाग--4 ****भाई आलम सिंह चौहान "नचणा" जी शहीद**** भाई आलम सिंह जी , चौहान राजपूत घराने से संबंध रखते थे। सूरज प्रकाश ग्रंथ,भट्ट बहियों,गुरु कीआं साखीयां आदि रचनाओं में इसका स्पष्ट उल्लेख है । "आलम सिंघ धरे सब आयुध,जात जिसी रजपूत भलेरी । खास मुसाहिब दास गुरु को,पास रहै नित श्री मुख हेरी । बोलन केर बिलास करैं, जिह संग सदा करुणा बहुतेरी । आयस ले हित संघर के,मन होए आनंद चलिओ तिस बेरी ।" (सूरज प्रकाश ग्रंथ- कवि संतोख सिंघ जी..रुत 6,अंसू 39,पन्ना 2948) भाई आलम सिंह जी का जन्म दुबुर्जी उदयकरन वाली,जिला स्यालकोट (अब पाकिस्तान) में सन् 1660 हुआ,जो उनके पूर्वजों ने सन् 1590 में बसाया था । भाई आलम सिंह जी के पिता राव (भाई)दुर्गा दास जी, दादा राव (भाई)पदम राए जी, परदादा राव (भाई)कौल दास जी ,सिख गुरु साहिबान के निकटवर्ती सिख व महान योद्धा थे । भाई आलम सिंह जी के दादा के भ्राता राव (भाई ) किशन राए जी छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब जी द्वारा  मुगलों के खिलाफ लड़ी करतारपुर की जंग में 27 अप्रैल 1635 को शहीद हुए थे । भाई आलम सिंह जी सन्...

सतीत्व की अनूठी मिशाल रानी पद्मिनी और गोरा बादल की वीरता

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🚩चित्तौड़ की महारानी पद्मनी  त्याग,सतीत्व,प्रेरणा,जौहर और वीरता की अनुपम मिशाल .... समय 13वीं ईस्वी जब चित्तौड़गढ़ लगातार तुर्को के हमले झेल रहा था बाप्पा रावल के वंशजो ने हिंदुस्तान को लगातार तुर्को और मुस्लिम आक्रांताओ को रोके रखा चित्तोड़ के रावल समर सिंह के बाद उनके बेटे रतन सिंह का अधिकार हुआ उनका विवाह रानी पद्धमणि से हुयी जो जालोर के चौहान वंश से थी (कुछ उन्हें सिंहल द्विव कुछ जैसलमेर के पूंगल की भाटी रानी भी बताते है) उस वक़्त जालोरऔर मेवाड़ की कीर्ति पुरे भारत में थे रतन सिंह जी की पत्नी पद्मनी अत्यंत सुन्दर थी इसी वजह से उनकी ख्याति दूर दूर फ़ैल गयी इसी वजह दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अल्लाउद्दीन ख़िलजी रानी पद्मनी की और आकर्षित होकर रानी को पाने की लालसा से चित्तोर चला आया और रानी पद्मणि को अपनी रानी बनाने की ठानी अल्लाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने चितौड़ के किले को कई महीनों घेरे रखा पर चितौड़ की रक्षार्थ तैनात राजपूत सैनिको के अदम्य साहस व वीरता के चलते कई महीनों की घेरा बंदी व युद्ध के बावजूद वह चितौड़ के किले में घुस नहीं पाया | अंत अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने थक हार कर एक योजना बनाई जिसम...

ठाकुर बलवन्त सिंह बखासर(1971 के भारत पाक युद्ध के हीरो)

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BALWANT SINGH BAKHASAR (CHAUHAN) THE HERO OF 1971 INDO-PAK WAR Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास चौहान बलवंत सिँह बाखासर(chauhan balvant singh bakhasar) (कहानी एक सच्चे देश प्रेमी धर्मपरायण जिंदा शेर दिल राजपूत की ) भारत की आजादी के बाद 60 70वे दशक मे पश्चिमी राजस्थान के लिए एक जाना पहचाना नाम था बलवँत सिँह बाखासर! गुजरात राजस्थान के सरकारी महकमे और पुलिस विभाग के लिए डकैत लेकिन बाडमेर साँचोर ओर उत्तरी गुजरात के वाव थराद सीमावर्ती गाँवो के लिए वे आधुनिक राबिन हुड समान थे बलवंत सिंह का जन्म राजस्थान के  बाड़मेर जिला के गांव बाखासर में चौहानो की नाडोला उप शाखा में हुआ आपकी शादी कच्छ गुजरात के विजेपासर गाव में जडेजा राजपूतो के यहाँ हुयी आपका बचपन राजस्थान गुजरात और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रो में गुजरा ये पूरी तरह यहाँ के सीमावर्ती क्षेत्रो को लेकर वाकिफ थे वक़्त के साथ बलवंत सिंह ने हथियार उठा दिए आजादी के बाद पाकिस्तान के सिँधी मुस्लिमो का सीमावर्ती क्षेत्रो मे आतँक था उस वक़्त बॉर्डर खुला होने की वजह से सिँधी मुस्लिम आये दिन भारतीय सीमा में आकर लूट पाठ करने लगे इधर ...

गोगा जी/गुग्गा जी चौहान (GOGA JI /GUGA JI CHAUHAN ,STORY OF A GREAT RAJPUT SAINT)

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--------जय जुझार वीर गोगा जी चौहान (जाहरवीर)जी की,जय गुरु गोरखनाथ जी की---------- चौहान वंश में सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी वीर और ख्याति प्राप्त राजा थे। गोगाजी को लोकमान्यताओं व लोककथाओं के अनुसार साँपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है।लोग उन्हें गोगाजी चौहान, गुग्गा, जाहर वीर व जाहर पीर के नामों से पुकारते हैं।यह गुरु गोरक्षनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी को समय की दृष्टि से प्रथम माना गया है।आज देश भर में उनकी बहुत अधिक मान्यता है,लगभग हर प्रदेश में उनकी माढ़ी बनी हुई है इनके भक्त सभी जातियों और धर्मो में मिलते हैं, जब महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था तब पश्चिमी राजस्थान में गोगा जी ने ही गजनी का रास्ता रोका था.घमासान युद्ध हुआ.गोगा ने अपने सभी पुत्रों, भतीजों, भांजों व अनेक रिश्तेदारों सहित जन्म भूमि और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान दे दिया.जिस स्थान पर उनका शरीर गिरा था उसे गोगामेडी कहते हैं.यह स्थान हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में है. इसके पास में ही गोरखटीला है. इनके भक्तों की संख्या करोडो में है,सभी उन्हें मात्र सिद्ध...

हरियाणा के संस्थापक राणा हरराय चौहान (RANA HAR RAI CHAUHAN,THE FOUNDER OF HARIYANA)

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हरियाणा के संस्थापक राणा हरराय चौहान(RANA HAR RAI CHAUHAN) Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास                                                           राणा हरराय चौहान मित्रों आज हम आपको चौहान वंश के ऐसे वीर यौद्धा की गाथा सुनाएंगे जिनके बारे आज बहुत कम लोग जानते हैं, एक समय हरियाणा के इतिहास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है,यही नहीं दसवी सदी में इस हिस्से पर उनके शासन के बाद ही यह क्षेत्र हरयाणा के नाम से प्रसिद्ध हुआ, आज हरियाणा,पंजाब,यमुना पार सहारनपुर,मुजफरनगर के लगभग सभी चौहान राजपूत राणा हर राय और उनके सगे सम्बन्धियों के वंशज हैं,यही नहीं गुर्जर,जाट,रोड,जातियों में जो चौहान वंश है उन सबके पूर्वज भी राणा हर राय चौहान को माना जाता है,जो राणा हर राय चौहान अथवा उनके पुत्रो के उस समय उन जातियों की महिलाओ से अंतरजातीय विवाह से उत्पन्न संतान के वंशज हैं जिनसे उन जातियों में चौहान वंश का प्रचलन हुआ, ========राणा हर राय चौहान का हरय...

अमर बलिदानी धर्मवीर रावल जयसिंह चौहान (पावा पति अथवा पताई रावल) 

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Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास -----गुजरात में चंपानेर के खींची चौहान राजपूतो का धर्मांध मुस्लिम सल्तनत से गौरवशाली संघर्ष------ FORT CHAMPANER GUJRAT मित्रो आज आपको भारतीय इतिहास के एक ऐसे गौरवशाली संघर्ष से परिचय कराएंगे जो राजपूतो के अपने धर्म के प्रति प्रतिबद्धता और स्वतंत्रता के प्रति लगाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। चंपानेर के चौहान वंश के खिची शाखा के राजपूतो ने अपने से कहीँ ज्यादा ताकतवर गुजरात की मुस्लिम सल्तनत से संघर्ष करते हुए उसके बिलकुल जड़ में एक सदी तक स्वतंत्र शाशन किया लेकिन कभी झुकना या धर्म परिवर्तन स्वीकार नही किया। गुजरात पर उस समय मुस्लिम सल्तनत का परचम लहरा रहा था। अहमदाबाद उसकी राजधानी थी। तब चांपानेर मे खींची चौहानो का राज अपनी वीरता और वैभव के लिए मशहूर था। चांपानेर के संस्थापक गुजरात नरेश वनराजसिंह चावडा थे। 1300 ई. में चौहानों ने चांपानेर पर अधिकार कर लिया था। एक ओर चौहानो के शौर्य का रस सुल्तानी सेना चख रही थी तो दुसरी और गुजरात का सुलतान आकुल व्याकुल हो रहा था। बात यह थी की अहमदाबाद के पास ही चांपानेर मे चौहान राजपूतो का छोटा सा राज्य था और कभी...