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कौन थे छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति प्रतापराव गुजर (Who was Prataprao Gujar)

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प्रतापराव गुजर (Who was Prataprao Gujar)--- एक बेहद हास्यास्पद प्रचार जो उत्तर भारत/ एनसीआर के पशुपालक गूजर/गुज्जर समुदाय द्वारा सोशल मीडिया पर किया जाता है वो यह कि हाईकोर्ट ने अपने किसी आदेश में छत्रपति शिवाजी महाराज को गूजर/गुज्जर जाति का होने की मान्यता दी है , यही नही इस दावे को हकीकत मानकर गूजर भाई छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती भी मनाते हैं! आइये करते हैं गूजरों के इस दावे की पड़ताल गूजर/गुज्जर जिस कोर्ट केस का लिंक शेयर करके छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी जाति से जोड़ते हैं दरअसल वो कोर्ट केस छत्रपति शिवाजी के सेनापति प्रतापराव गुजर के एक वंशज ने किया था जो सम्पत्ति विवाद था, उस आदेश में कहीं भी शिवाजी महाराज की जाति को लेकर कोई निर्णय नही दिया गया न ही यह उस मुकदमे का कोई हिस्सा था!! वो सीधा सीधा संपत्ति विवाद था। अब आइये जानिए कौन थे शिवाजी महाराज के प्रमुख सेनापति प्रतापराव गुजर?? क्या प्रतापराव गुजर का सम्बन्ध उत्तर भारत की गूजर/गुज्जर बिरादरी से था?? क्या महाराष्ट्र में भी गूजर/गुज्जर बिरादरी की कोई आबादी है ?? तो जानिए सच्चाई :- महाराष्ट्र में 96 कुली मराठा क्षत्रिय जाति में...

गुर्जरदेश, गुर्जरात्रा और चौकीदार गुर्जर जाति की उत्पत्ति (Gurjar desh and Chaukidar Goojar/Gujjar caste)

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उत्तर मध्य काल में पश्चिम भारत मे एक प्रदेश होता था जिसका नाम था गुर्जरात्रा या गुर्जरदेश। इस प्रदेश की सीमा में आज के दक्षिण पश्चिम राजस्थान के जालोर, सिरोही, बाड़मेर जिले और आज के उत्तर गुजरात के बनासकांठा, पाटन और मेहसाणा आदि जिले आते थे। इस क्षेत्र का नाम यहां की अर्थव्यवस्था और समाज के गौपालन पर टिके होने की वजह से पड़ा। गूजर गौचर का ही अपभ्रंश है। इस क्षेत्र में आज भी भारत के सबसे सघन घास के मैदान और गौचर भूमि मिलती है। इस कारण और सूखे क्षेत्र होने की वजह से कृषि बेहद सीमित होने के कारण यहां की जनसंख्या पूरी तरह गौपालन से जुड़ी हुई थी। यहां तक कि कुछ दशक पहले तक भी देश का यह संभवतया अकेला क्षेत्र था जहाँ गौपालन अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था। देश की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला इसी क्षेत्र के बीचों बीच स्थित है। देश के सबसे बड़े घास के मैदान 'बनी' ग्रासलैंड इसी क्षेत्र में मिलते हैं। आज भी रबाड़ी, मालधारी, भरवाड़ आदि अनेक पशुपालक जातियो की इस क्षेत्र में बड़ी आबादी है। इसी लिए इस प्रदेश का नाम गौचर बहुल होने से गूजर या गुर्जरदेश पड़ा और यहां के निवासियों को गूजर/गुर्जर कहा गया। कई बार ज...