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गुर्जरदेश, गुर्जरात्रा और चौकीदार गुर्जर जाति की उत्पत्ति (Gurjar desh and Chaukidar Goojar/Gujjar caste)

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उत्तर मध्य काल में पश्चिम भारत मे एक प्रदेश होता था जिसका नाम था गुर्जरात्रा या गुर्जरदेश। इस प्रदेश की सीमा में आज के दक्षिण पश्चिम राजस्थान के जालोर, सिरोही, बाड़मेर जिले और आज के उत्तर गुजरात के बनासकांठा, पाटन और मेहसाणा आदि जिले आते थे। इस क्षेत्र का नाम यहां की अर्थव्यवस्था और समाज के गौपालन पर टिके होने की वजह से पड़ा। गूजर गौचर का ही अपभ्रंश है। इस क्षेत्र में आज भी भारत के सबसे सघन घास के मैदान और गौचर भूमि मिलती है। इस कारण और सूखे क्षेत्र होने की वजह से कृषि बेहद सीमित होने के कारण यहां की जनसंख्या पूरी तरह गौपालन से जुड़ी हुई थी। यहां तक कि कुछ दशक पहले तक भी देश का यह संभवतया अकेला क्षेत्र था जहाँ गौपालन अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था। देश की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला इसी क्षेत्र के बीचों बीच स्थित है। देश के सबसे बड़े घास के मैदान 'बनी' ग्रासलैंड इसी क्षेत्र में मिलते हैं। आज भी रबाड़ी, मालधारी, भरवाड़ आदि अनेक पशुपालक जातियो की इस क्षेत्र में बड़ी आबादी है। इसी लिए इस प्रदेश का नाम गौचर बहुल होने से गूजर या गुर्जरदेश पड़ा और यहां के निवासियों को गूजर/गुर्जर कहा गया। कई बार ज...

मुरैना जिला की तंवरघार का एक ऐतिहासिक कुआँ जिसका पानी पीने से ही इन ग्रामीणों के अंदर आत्मसम्मान स्वाभिमान का भाव पैदा हो जाता है।

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  मुरैना जिला की तंवरघार का एक ऐतिहासिक कुआँ जिसका पानी पीने से ही इन ग्रामीणों के अंदर आत्मसम्मान स्वाभिमान का भाव पैदा हो जाता है। **साधारण नहीं था 100 साल पुराने इस कुएं का पानी, 2 महीने अंग्रेज थे परेशान** मुरैना जिले की पोरसा के तहसील के ग्राम कौंथर का नाम आते ही उस प्राचीन कुएं की यादें दिमाग में उभर आती हैं, जिसके बारे में अभी तक यह कहा जाता था कि जो भी इस कुएं का पानी पीता है, उसके अंदर आक्रोश उत्तेजना पैदा हो जाती है और लोग एक-दूसरे को मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं। मगर हकीकत इसके विपरीत है। कौंथर के प्राचीन कुएं का पानी उत्तेजित करने वाला नहीं बल्कि स्वाभिमान आत्मसम्मान का भाव पैदा करने वाला था। कौंथर गांव में स्थित माता मंदिर के पुजारी आशाराम (70) बताते हैं कि तकरीबन 100 वर्ष पूर्व कौंथर गांव के तीन बागी भाइयों भूपसिंह तोमर, जिमीपाल तोमर और मोहन सिंह तोमर ने नागाजी धाम के महाराज कंधरदास के प्रयासों से बीहड़ों का रास्ता छोड़कर गौ हत्या रोकने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ तीनों भाइयों ने ग्वालियर मुरार के कसाईखाने पर हमला बोल दिया, जहां गौवंश को काटकर मांस का निर...

NAYAK NEERAJ KUMAR SINGH RAGHAV नायक नीरज कुमार सिंह राघव

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NAYAK NEERAJ KUMAR SINGH RAGHAV नायक नीरज कुमार सिंह राघव   मित्रों बहुत हर्ष के साथ जानकारी देना चाहेंगे कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राइफल के नायक नीरज कुमार सिंह राघव को मरणोपरांत शांतिकाल में दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। आइए देश के इस वीर बेटे से जुड़ी पांच बातें जानें-: 1: देश के वीर सपूत नीरज कुमार सिंह का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर के देवराला गांव में हुआ था। 2: नीरज 57 राष्ट्रीय रायफल में तैनात थे। 3: शहीद नीरज सामान्‍य परिवार से थे, वो राघव (बडगूजर राजपूत) वंश से थे।उनकी स्‍कूली पढ़ाई गांव के स्‍कूल से ही हुई थी। उनके भाई का नाम सतीश राघव है। 4: 2014 के 24 अगस्त को कुपवाड़ा के गुरदाजी सेक्टर में नायक नीरज सिंह के गश्ती दल पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें एक जवान बुरी तरह घायल हो गया। नीरज ने अपनी जान की परवाह न करते हुए ग्रेनेड हमला कर रहे उस आतंकी को मार गिराया, जबकि दूसरे दहशतगर्द ने इस बहादुर जवान के सीने में गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नीरज सिंह उस आतंकवादी से दौड़ कर भिड़...

वीर कान्हड़देव सोनगरा,जिन्होंने अलाउद्दीन ख़िलजी से छीनी सोमनाथ मन्दिर की लूटी हुई मूर्तियां और बनवाया भव्य मन्दिर

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=== वीर कान्हड़देव सोनगरा,जिन्होंने अलाउद्दीन ख़िलजी से छीनी सोमनाथ मन्दिर की लूटी हुई मूर्तियां और बनवाया भव्य मन्दिर === VEER KANHARDEV SONIGARA जालौर के वीर कान्हड़देव सोनीगरा जिन्होंने अल्लाउद्दीन ख़िलजी से छीनी सोमनाथ मंदिर से लूटी हुयी मुर्तिया और बनवाया भव्य मंदिर राजपुताना हमेशा धर्म की रक्षा में आगे रहा है कण कण में वीरो का बलिदान है ऐसा कोई गाव नही जहा राजपूत झुंझार की देवालय छतरिया न हो वक़्त 12वीं शताब्दी जब भारत तुर्को के जिहादी हमले झेल रहा था उसी समय जालौर में चौहानो  की शाखा सोनीगरा में महाराजा सामंत सिंह के यहाँ जन्म हुआ वीर कान्हड़देव का जो आगे चल कर जालौर के राजा बने उनके कुशल नेतृत्व में जालौर की सीमाये सुदृढ़ हुयी और कान्हड़देव जी स्वर्णगिरी दुर्ग से राज्य चलने लगे राज्य में एक से बढ़ कर एक योद्धा थे उसी समय अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने गुजरात में आक्रमण किया और बहुत मार काट मचाई उसने हिन्दुओ के 12 ज्योतीर्लिंग में से एक सोमनाथ महादेव के मंदिर को 1298 ईस्वी में पुनः लूटा और हजारो लोगो को गुलाम बना कर अल्लाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने सेनापति उलुग खा के साथ उत्तर की तरफ रुख किया...

===महान राजपूत व्यक्तित्व स्व. ठाकुर मेघनाथ सिंह शिसौदिया===

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मित्रों आज राजपूताने की एक महान हस्ती से आपका परिचय कराएंगे जो आधुनिक युग में राजपूतो के लिये प्रेरणास्त्रोत हैँ। इन हस्ती का नाम है ठाकुर मेघनाथ सिंह शिशोदिया जिन्हें साठा शिरोमणी भी कहा जाता है। साठा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गहलोत/शिशोदिया राजपूत बाहु ल्य इलाका है जहाँ इनके 60 गाँव हैँ। ठाकुर मेघनाथ सिंह जी को मशहूर शिक्षाविद् ,समाज सुधारक और अपने समय के बहुत ईमानदार एवं जबरदस्त विकास कराने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। ग्रामीण और सामाजिक विकास में रूचि रखने के कारण उन्होंने साठा क्षेत्र के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजपूत बाहुल्य क्षेत्र में अनेक शिक्षण संस्थाओ की स्थापना करी जिसमे स्कूल, कॉलेज, आई टी आई, डिप्लोमा, वोकेशनल कोर्सेज के संस्थान शामिल हैँ। इनके द्वारा उन्होंने हजारो युवाओ को रोजगार दिया। विधायक रहते हुए साठा क्षेत्र का अद्वितीय विकास कराया जिसके लिये इस क्षेत्र के सबसे बड़े व्यक्तित्व के रूप में आज भी वो याद किये जाते हैँ और उन्हें साठा शिरोमणी कहा जाता है। ठाकुर साब का जन्म 1 अप्रैल 1913 को जिला गाज़ियाबाद में साठा क्षेत्र के रसूलपुर डासना गाँव में ठाकुर नारायण...

1857 स्वाधीनता संग्राम की शुरुआत करने वाले राजपूत Rajputs who started freedom struggle of 1857

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1857 का स्वाधीनता संग्राम प्रमुखतः एक सैनिक विद्रोह था. सैनिको ने ही इस विद्रोह की शुरुआत की थी और बढ़चढ़कर इसमें भाग लिया था. अपितु सैनिक ही इस विद्रोह की रीड थे और गंभीरता से अंग्रेज हुकूमत को उखाड़ने के लिए प्रयासरत थे. अधिकतर सैनिको ने विद्रोह कर अपने घर जाने के बजाए(जो की वो आसानी से कर सकते थे और ज़िंदा बचे रहते) अंत तक युद्ध करना स्वीकार किया और लड़ते हुए शहीद हुए. कई जाती समूहों ने इस विद्रोह में सिर्फ लूटपाट की जिन्हें खुद विद्रोही सैनिको ने सजाए भी दी और कइयो ने व्यक्तिगत कारणों से विद्रोह किया और उनके नाम इतिहास में क्रांतिकारियों में अमर हो गए. लेकिन जिन लाखो सैनिको ने बिना किसी प्रलोभन के निस्वार्थ भाव और निडरता से अभावो में भी अंग्रेजो से युद्ध किया उनमे से बहुत ही कम सैनिको के नाम लोगो को पता है. लाखो सैनिक अपने घरो से दूर गुमनाम मौत मरे जिनकी लाशो को भी उचित सम्मान ना मिला. हजारो सैनिको ने लड़ते हुए वीरता की अद्भुत मिसाले पेश करी लेकिन इनके नाम पते कभी इतिहास में जगह नही बना पाए. इन सैनिको में अधिकतर उत्तर प्रदेश विशेषकर अवध, बिहार के भोजपुर क्षेत्र के राजपूत, ब्राह्मण और मुस...

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप, महानतम स्वतंत्रता सेनानी क्यों? Why maharana pratap, the greatest ever freedom fighter?

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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप , राष्ट्रभक्तो  के आदर्श maharana pratap, the greatest ever freedom fighter आजकल कुछ लोग महाराणा प्रताप की लोकप्रियता पर सवाल उठाते हैं, उनको नायक बताए जाने पर सवाल उठाते हैं, उनको भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी कहने पर सवाल करते हैं, उनकी वीरता पर सवाल करते हैं, वो कहते हैं कि एक छोटे से राज्य के छोटे से राजा को इतना सम्मान क्यों? एक छोटा से राज्य का राजा अकबर से महान क्यों? जिनको भी इस तरह की शंकाए हैँ उन्हें यह पोस्ट  जरूर पढ़ाएं-- भारत के अंग्रेजो से स्वतंत्रता के आंदोलन में क्रान्तिकारियो के लिये मेवाड़ की धरती, चित्तौड़गढ़ और हल्दीघाटी तीर्थस्थल बन चुके थे। क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति के हर सदस्य के लिये मेवाड़ की तीर्थ यात्रा कर चित्तोड़ के विजय स्तम्भ के नीचे शपथ लेना अनिवार्य था। भारतवर्ष से देशभक्त, क्रन्तिकारी हल्दीघाटी की मिट्टी का तिलक करने आते थे। वस्तुतः अंग्रेज़ो की दासता से मुक्ति दिलाने के लिये महाराणा प्रताप के नाम ने जादू का काम किया। महाराणा प्रताप विशाल ब्रितानी साम्राज्य से जूझते राष्ट्रभक्तो के लिये आदर्श और प्रेरणापुंज थे। कर्न...

अमर स्वतंत्रता सेनानी, शहीद महावीर सिंह राठौर Mahaveer singh rathore, the great freedom fighter

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अमर स्वतंत्रता सेनानी, शहीद महावीर सिंह राठौर जी को शत शत नमन _/\_ कृप्या एक बार पूरा पढ़े और शेयर जरूर करें। 16 सितंबर 1904 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले के राठौर राजपूतो के ठिकाने राजा का रामपुर के शाहपुर टहला (अब कासगंज जिला) में ठाकुर देवी सिंह जी के यहाँ जन्मे महावीर सिंह ने एटा के राजकीय इंटर कॉलेज से पढाई करने के बाद आगे की पढाई के लिये कानपुर के DAV कॉलेज में दाखिल लिया। महावीर सिंह जी को घर से ही देशभक्ति की शिक्षा मिली थी। कानपुर में इनको क्रान्तिकारियो का सानिध्य मिला और ये पूरी तरह अंग्रेजो के विरुद्ध क्रांतिकारी संघर्ष में कूद पड़े। उनके पिता को भी जब इसका पता चला तो उन्होंने कोई विरोध करने की जगह अपने पुत्र को देश के लिये बलिदान होने के लिये आशीर्वाद दिया। भगत सिंह जैसे अनेक क्रांतिकारी अंग्रेज़ो से छिपने के लिये उनके गाँव के घर में ही रुकते थे। भगत सिंह खुद 3 दिन उनके घर रुके थे। काकोरी कांड और सांडर्स कांड में शामिल होने के बाद वो अंग्रेज़ो के लिये चुनौती बन गए थे। उन्होंने सांडर्स की हत्या के बाद भगत सिंह को लाहौर से निकालने में सक्रीय भूमिका निभाई थी। अपने खिलाफ अंग्रेज़ो के...

LEGENDARY WARRIOR THAKUR MOHAN SINGH MADHAD

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====हुतात्मा ठाकुर मोहन सिंह मडाड==== (यादगार अहमद की तवारीखें-सलतीने-अफगाना; इलियट एंड डौसन भाग 5; बाबरनामा, सर एडीलवर्ट टेबोलेट का अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित) ठाकुर मोहन सिंह मडाड का इतिहास साहस और शौर्य की परकाष्ठा है और भारत के इतिहास में जालौर के सोनीगारा चौहान वीरमदेव के बाद क्षत्रियों का शौर्य प्रदर्शित करने वाले इस दुर्लभ वीर पुरुष की जितनी प्रशंशा की जाय वह कम ही होगी क्योकि अल्प और सीमित साधन रहते हुए इन्होंने उस बाबर की समुद्र सी लहराती प्रबल सत्ता को चुनौती दी उसके अह्निर्श विजयों से उत्तर भारत थर थर काँप रहा था, इन्होंने उस महाबली बाबर को भी अपनी तलवार का पानी पिला कर छोड़ा। यह घटना है हिजरी 936 की है| उस समय बाबर लाहौर में था और आगरा जाने की तैयारी में था। बाबर ने लाहौर से आगरा जोन के लिए प्रस्थान किया। सरहिंद पहुँचने पर उसे समाना के काजी ने उससे मुलाकात कर बताया की कैथल के मोहन सिंह मडाड (मंडहिर) नामक राजपूत ने उसकी इमलाक (जागीर) पर हमला करके उसे लूटा पाटा और जलाया और उसके बेटे को मार डाला। काजी की बात सुन के आग बबूला हुए बाबर ने फ़ौरन ही तीन हजार घुड़सवारों के साथ अली कुली ...

YADUVANSHI CHUDASMA KSHATRIYA CLAN

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RAJPUTANA SOCH और क्षत्रिय इतिहास यदुवंशी चुडासमा क्षत्रिय वंश ==चुडासमा क्षत्रिय_वंश परिचय== गोत्र : अत्रि वंश : चन्द्रवंश / यादव / यदुवंश शाखा : माध्यायनी कुल देवी : अम्बा भवानी सहायक देवी: खोडियार माँ आदि पुरुष: आदिनारयण भगवान कुल देवता: भगवन श्री कृष्ण तलवार : ताती ध्वजा : केसरी शंख: अजय नदी: कालिंदी नगाड़ा : अजीत मुख्य गद्दी : जूनागढ़ == जूनागढ़ और चुडासमा का इतिहास == >जुनागढ का नाम सुनते ही लोगो के दिमाग मे "आरझी हकुमत द्वारा जुनागढ का भारतसंघ मे विलय, कुतो के शोखीन नवाब, भुट्टो की पाकिस्तान तरफी नीति " जैसे विचार ही आयेंगे, क्योकी हमारे देश मे ईतिहास के नाम पर मुस्लिमो और अंग्रेजो की गुलामी के बारे मे ही पढाया जाता है, कभी भी हमारे गौरवशाली पूर्खो के बारे मे कही भी नही पढाया जाता || जब की हमारा ईतिहास इससे कई ज्यादा गौरवशाली, सतत संघर्षपूर्ण और वीरता से भरा हुआ है ||  > जुनागढ का ईतिहास भी उतना ही रोमांच, रहस्यो और कथाओ से भरा पडा है || जुनागढ पहले से ही गुजरात के भुगोल और ईतिहास का केन्द्र रहा है, खास कर गुजरात के सोरठ प्रांत की राजधानी रहा है || गिरीनगर के नाम से...

SHOOTER BAISA_APOORVI CHANDELA

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‪ Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास THE LEGEND OF RAJPUTANA_ APOORVI CHANDELA BAISA #‎ अपूर्वी_चंदेला‬  देश का उभरता हुआ नाम  अपूर्वी चंदेला का जन्म जयपुर में कुलदीप सिंह जी ये घर हुआ जो एक सफल होटल व्यवसाईं है अपूर्वी चंदेला भारत की एक राष्ट्रीय शूटर है इन्होंने बहुत ही कम उम्र में सफलता के झंडे गाड़े है ये अगले ओलम्पिक के लिए क्वलिफाईड कर चुकी है वही TOI के टॉप युवा प्रतिभाओ में इनको स्थान मिला कॉमन वेल्थ गेम 2014 ग्लासगोमें 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग इवेंट में 206.7 का स्कोर बनाकर भारत को दूसरी बार निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाया। अपूर्वी चंदेला ने इतिहास रच कर जर्मनी मे अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग में भारत को कांस्य पदक जिताया..... वही अपूर्वी ने ISSF World Cup म्यूनिख में निशानेबाजी में अपूर्वी चंदेला ने देश के लिए जीता रजत पदक अपूर्वी लगातार 3 साल से 10 मीटर शूटिंग में नैशनल चेम्पियन है,इन्हें हाल ही में अगस्त 2016 में अर्जुन अवार्ड मिला है। इनका परिवार हिमाचल के बिलासपुर राजपरिवार के चंदेला वंश से तालुक रखता है वहा से इनके पर दादा जी उठ कर उदयपुर आ गए थे वहा ये ली...

अमर बलिदानी धर्मवीर रावल जयसिंह चौहान (पावा पति अथवा पताई रावल) 

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Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास -----गुजरात में चंपानेर के खींची चौहान राजपूतो का धर्मांध मुस्लिम सल्तनत से गौरवशाली संघर्ष------ FORT CHAMPANER GUJRAT मित्रो आज आपको भारतीय इतिहास के एक ऐसे गौरवशाली संघर्ष से परिचय कराएंगे जो राजपूतो के अपने धर्म के प्रति प्रतिबद्धता और स्वतंत्रता के प्रति लगाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। चंपानेर के चौहान वंश के खिची शाखा के राजपूतो ने अपने से कहीँ ज्यादा ताकतवर गुजरात की मुस्लिम सल्तनत से संघर्ष करते हुए उसके बिलकुल जड़ में एक सदी तक स्वतंत्र शाशन किया लेकिन कभी झुकना या धर्म परिवर्तन स्वीकार नही किया। गुजरात पर उस समय मुस्लिम सल्तनत का परचम लहरा रहा था। अहमदाबाद उसकी राजधानी थी। तब चांपानेर मे खींची चौहानो का राज अपनी वीरता और वैभव के लिए मशहूर था। चांपानेर के संस्थापक गुजरात नरेश वनराजसिंह चावडा थे। 1300 ई. में चौहानों ने चांपानेर पर अधिकार कर लिया था। एक ओर चौहानो के शौर्य का रस सुल्तानी सेना चख रही थी तो दुसरी और गुजरात का सुलतान आकुल व्याकुल हो रहा था। बात यह थी की अहमदाबाद के पास ही चांपानेर मे चौहान राजपूतो का छोटा सा राज्य था और कभी...