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1857 की क्रांति में उत्तर प्रदेश की साठा-चौरासी के राजपूतो का संघर्ष भाग-1

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लाल किले पर केसरिया फहराने वाले राजपूत Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास ===अंग्रेज़ो के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में राजपूतो का योगदान- भाग-4 === ****1857 की क्रांति में साठा-चौरासी के राजपूतो का संघर्ष भाग-1*** ~~लाल किले पर केसरिया फहराने वाले राजपूत~~ ****1857 की क्रांति में साठा-चौरासी के राजपूतो का संघर्ष भाग-1*** (edited on date 02-09-2015) पिछले 4 दिन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दादरी के पास बिसाहदा गाँव में गौ हत्या का मामला देश भर में सुर्खिया बन रहा है। हालाकि इस मामले में अब मीडिया के झूठ और सरकार के पक्षपात पूर्ण रवैय्ये की वजह से मामले को दूसरा रूप दे दिया गया है। यह बिसाहदा गाँव क्षत्रियों के मशहूर साठा चौरासी क्षेत्र का हिस्सा है। इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में बवाल के हालात हैँ। यहाँ के क्षत्रिय पुलिस से भिड़ने को तैयार हैँ और कई जगह भिड़ंत हो चुकी है। दरअसल सरकारी दमन का डट कर विरोध करने का इस क्षेत्र का इतिहास रहा है। 1857 के संग्राम में भी यहां के क्षत्रियो ने अंग्रेजो के विरुद्ध बढ़ चढ़ कर भाग लिया था। इन क्षत्रियो में गौ रक्षा को लेकर कितना आग्रह है य...

सतीत्व की अनूठी मिशाल रानी पद्मिनी और गोरा बादल की वीरता

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🚩चित्तौड़ की महारानी पद्मनी  त्याग,सतीत्व,प्रेरणा,जौहर और वीरता की अनुपम मिशाल .... समय 13वीं ईस्वी जब चित्तौड़गढ़ लगातार तुर्को के हमले झेल रहा था बाप्पा रावल के वंशजो ने हिंदुस्तान को लगातार तुर्को और मुस्लिम आक्रांताओ को रोके रखा चित्तोड़ के रावल समर सिंह के बाद उनके बेटे रतन सिंह का अधिकार हुआ उनका विवाह रानी पद्धमणि से हुयी जो जालोर के चौहान वंश से थी (कुछ उन्हें सिंहल द्विव कुछ जैसलमेर के पूंगल की भाटी रानी भी बताते है) उस वक़्त जालोरऔर मेवाड़ की कीर्ति पुरे भारत में थे रतन सिंह जी की पत्नी पद्मनी अत्यंत सुन्दर थी इसी वजह से उनकी ख्याति दूर दूर फ़ैल गयी इसी वजह दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अल्लाउद्दीन ख़िलजी रानी पद्मनी की और आकर्षित होकर रानी को पाने की लालसा से चित्तोर चला आया और रानी पद्मणि को अपनी रानी बनाने की ठानी अल्लाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने चितौड़ के किले को कई महीनों घेरे रखा पर चितौड़ की रक्षार्थ तैनात राजपूत सैनिको के अदम्य साहस व वीरता के चलते कई महीनों की घेरा बंदी व युद्ध के बावजूद वह चितौड़ के किले में घुस नहीं पाया | अंत अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने थक हार कर एक योजना बनाई जिसम...

शिशोदिया क्षत्रिय कुलावतंस छत्रपति शिवाजी महाराज भोंसले (SHIVAJI THE GREAT)

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                                          हिंदुत्व के रक्षक वीर यौद्धा छत्रपति शिवाजी                        Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास वीर मराठा क्षत्रिय----छत्रपति शिवाजी महाराज जन्म और वंश परिचय,प्रारम्भिक जीवन----- क्षत्रपति शिवाजी राजे भोंसले का जन्म 19 फ़रवरी 1630 को पश्चिमी महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थी जो जाधव(यदुवंशी) वंश के क्षत्रियोँ की पुत्री थीं जिन्होंने महाराष्ट्र में कई सदियोँ तक राज किया था। भोंसले वंश मराठा देश के क्षत्रियो का प्रमुख वंश है जिसका निकास मेवाड़ के गहलोत/सिसोदिया वंश से हुआ है। इस तरह भारत के दो महान सुपुत्र और क्षत्रियों के गौरव महाराणा प्रताप और शिवाजी राजे एक ही वंश से संबंध रखते हैँ। शिवाजी राजे के पिता शाहजी राजे दक्षिण भारत के एक शक्तिशाली सामंत थे और उनकी माता जीजाबाई एक आदर्श क्षत्राणी और असाधारण महिला थी। उनका बचपन...