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शहीद उदासिंह राठौड़ जी,एक वीर सिख राजपूत यौद्धा

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सिक्ख धर्म की स्थापना में राजपूतों का योगदान भाग-5 वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा शहीद भाई ऊदा जी राठौड़ (रमाने राठौड़) श्री गुरु तेगबहादुर जी की दिल्ली के चांदनी चौंक में हुई शहादत के पश्चात उनके पावन धड़ का अंतिम संस्कार भाई लक्खी राय जी ने अपने घर को आग लगाकर कर दिया गया । दूसरी तरफ भाई जैता जी गुरु साहिब के शीश को उठा के चल पड़े । रास्ते में उनके पिता भाई अाज्ञा जी,भाई नानू जी व भाई ऊदा जी उनसे आ मिले । ये चारों सिख दिन रात सफर करके श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे । गुरु गोबिन्द सिंघ जी ने सभी को प्यार दिया व विशेष रूप से भाई जैता जी को रंघरेटा गुरु का बेटा कह के सम्मान दिया । भाई अाज्ञा जी व भाई जैता जी रंघरेटा जाति से संबंध रखते थे और दिल्ली निवासी थे । भाई नानू जी छींबा जाति से संबंध रखते थे और वो भी दिल्ली निवासी थे । भाई ऊदा जी राठौड़ राजपूत घराने से संबंध रखते थे और उनकी शाखा "रमाने" थी । भाई ऊदा जी का जन्म राव खेमा चंदनीया जी के घर 14 जून 1646 ईस्वी को हुआ । आप राव धर्मा जी राठौड़ के पोते व राव भोजा जी राठौड़ के पड़पोते थे । आप की उस्ताद भाई बज्जर सिंघ जी राठौड़ के साथ भी रिश्ते...

आलम सिंह चौहान नचणा जी,वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा(Alam singh chauhan nachna, great sikh rajput warrior

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सिक्ख धर्म की स्थापना में राजपूतों का योगदान भाग--4 ****भाई आलम सिंह चौहान "नचणा" जी शहीद**** भाई आलम सिंह जी , चौहान राजपूत घराने से संबंध रखते थे। सूरज प्रकाश ग्रंथ,भट्ट बहियों,गुरु कीआं साखीयां आदि रचनाओं में इसका स्पष्ट उल्लेख है । "आलम सिंघ धरे सब आयुध,जात जिसी रजपूत भलेरी । खास मुसाहिब दास गुरु को,पास रहै नित श्री मुख हेरी । बोलन केर बिलास करैं, जिह संग सदा करुणा बहुतेरी । आयस ले हित संघर के,मन होए आनंद चलिओ तिस बेरी ।" (सूरज प्रकाश ग्रंथ- कवि संतोख सिंघ जी..रुत 6,अंसू 39,पन्ना 2948) भाई आलम सिंह जी का जन्म दुबुर्जी उदयकरन वाली,जिला स्यालकोट (अब पाकिस्तान) में सन् 1660 हुआ,जो उनके पूर्वजों ने सन् 1590 में बसाया था । भाई आलम सिंह जी के पिता राव (भाई)दुर्गा दास जी, दादा राव (भाई)पदम राए जी, परदादा राव (भाई)कौल दास जी ,सिख गुरु साहिबान के निकटवर्ती सिख व महान योद्धा थे । भाई आलम सिंह जी के दादा के भ्राता राव (भाई ) किशन राए जी छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब जी द्वारा  मुगलों के खिलाफ लड़ी करतारपुर की जंग में 27 अप्रैल 1635 को शहीद हुए थे । भाई आलम सिंह जी सन्...

सरदार बज्जर सिंह राठौर, जिन्होंने गुरु गोविन्द सिंह जी को शस्त्र विद्या दी

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SARDAR BAJJAR SINGH RATHORE Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास          ~~~सिख धर्म के उत्थान में राजपूतो का योगदान~~~ सिख धर्म के उत्थान में राजपूतो का योगदान भाग- -1  सरदार बज्जर सिंह राठौड---- जिन्होने गुरू गोविंद सिंह जी को अस्त्र शस्त्र की दीक्षा दी थी। Sardar bajjar singh rathore  सरदार बज्जर सिंह राठौड़ के विषय में, जिनका देश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान है बहुत कम लोग इससे परिचित हैँ। सरदार बज्जर सिंह राठौड सिक्खो के दसवे गुरू श्री गोविंद सिंह जी के गुरू थे ,जिन्होने उनको अस्त्र शस्त्र चलाने मे निपुण बनाया था। बज्जर सिंह जी ने गुरू गोविंद सिंह जी को ना केवल युद्ध की कला सिखाई बल्कि उनको बिना शस्त्र के द्वंद युद्ध, घुड़सवारी, तीरंदाजी मे भी निपुण किया। उन्हे राजपूत -मुगल युद्धो का भी अनुभव था और प्राचीन भारतीय युद्ध कला मे भी पारंगत थे। वो बहुत से खूंखार जानवरो के साथ अपने शिष्यों को लडवाकर उनकी परिक्षा लेते थे। गुरू गोविंद सिंह जी ने अपने ग्रन्थ बिचित्तर नाटक मे इनका वर्णन किया है। उनके द्वारा आम सिक्खो का सैन्यिकरण किया गया जो प...

सरदार बाज सिंह पंवार ,खालसा राज के पहले गवर्नर

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====== सिक्ख धर्म के उत्थान में राजपूतों का योगदान पार्ट 3 ======= Rajputana Soch  राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास (See English translation below; a special thanks to Sardar Harshveer singh ji for this post ) खालसा राज के पहले शाशक- सरदार बाज़ सिंह परमार Sardar baj singh parmar ,first governor of khalsa raj----- मित्रों जैसा के आप सभी लोग जानते है हमने सिख धर्म के उत्थान में देश के क्षत्रियों द्वारा दिए गए योगदानों को लेकर एक पोस्ट की श्रंखला चलाई हुई है। इस श्रृंखला के तहत हमारा उद्देश्य वीर सिख राजपूत योद्धाओं के बलिदान से लोगो को अवगत कराना है। इस श्रृंखला के तहत हम पिछली पोस्ट्स में सरदार बज्जर सिंह राठौर जो की गुरु गोविंद सिंह जी के शस्त्र विद्या के गुरु थे और वीर बंदा बहादुर मन्हास के बारे में बता चुके है। आज बारी है राव सरदार बाज सिंह जी पुआर (परमार) की जो खालसा राज के प्रथम गवर्नर (राज्यपाल) थे। ये किसी भी क्षेत्र पर शाशन करने वाले पहले सिक्ख शाशक बने जब इन्हें सरहिंद का सूबेदार बनाया गया। सरदार बाज सिंह जी पुआर (परमार) जिन्हे बाज बहादुर क...

बन्दा सिंह बहादुर एक वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा जिसने सिक्ख राज्य की नींव रखी

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Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास VEER BANDA BAHADUR SINGH MANHAS--सिख धर्म की स्थापना में राजपूतो का योगदान(पार्ट 2)- VEER BANDA SINGH BAHADUR MANHAS KSHATRIYA RAJPUT _______बन्दा सिंह बहादुर_______ --सिख धर्म की स्थापना में राजपूतो का योगदान(पार्ट 2)-- कहानी एक राजपूत वीर की जिसने प्रथम सिख साम्राज्य की नीव रखी। ये पंजाब के पहले ऐसे सेनापति थे जिन्होंने मुगलो के अजय होने का भ्रम तोडा। हम बात कर रहे है वीर बंदा सिंह बहादुर की, बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर स्थित पुंछ जिले के राजौरी क्षेत्र में 16 अक्टूबर अथवा 27 अक्टूबर 1670 ई. तदनुसार विक्रम संवत् 1727, कार्तिक शुक्ल 13 को हुआ था। वह राजपूतों के (मिन्हास) भारद्वाज गोत्र से सम्बद्ध थे और उनका वास्तविक नाम लक्ष्मणदेव था। इनके पिता का नाम रामदेव मिन्हास और जन्मस्थान डस्सल अथवा तच्छल  गांव था। 15 वर्ष की उम्र में हिरणी का शिकार करने पर वैराग्य जीवन धारण किया, वह जानकीप्रसाद नाम के एक बैरागी के शिष्य बन गए और उनका नाम माधोदास पड़ा।  तदन्तर उन्होंने एक अन्य बाबा रामदास बैरागी का शिष्यत्व ग्रहण किया और कुछ समय...