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सेना में वीर राजपूतों की उपेक्षा बंद करने एवं उनकी संख्या बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में मोदी सरकार से मांग

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=====मोदी सरकार से क्षत्रियों की माँग भाग संख्या--4===== सेना में वीर राजपूतों की उपेक्षा बंद करने एवं उनकी संख्या बढ़ाए जाने की मांग------ राजपूत सदियों से भारतीय प्रतिरक्षा की रीढ़ की हड्डी रहे हैं,राजपूत समाज सदियों से राष्ट्र रक्षा में अपना सर्वस्व बलिदान करता आया है, आजादी के बाद भी यह परम्परा कायम है,सर्वाधिक 5 परमवीर चक्र,महावीर चक्र,अशोक चक्र राजपूतों ने ही जीते हैं और सबसे ज्यादा गैलेंट्री अवार्ड्स भी राजपूतो को ही प्राप्त हुए हैं, मेजर शैतान सिंह भाटी,पीरु सिंह शेखावत,जदुनाथ सिंह राठौड़,गुरुबचन सिंह सलारिया,संजय कुमार डोगरा,जसवंत सिंह रावत,जनरल हणूत सिंह,जैसे परमवीर योद्धाओं का बलिदान क्या भुलाया जा सकता है??????? किन्तु देखा जा रहा है कि राजपूतो को सेना में भी नजरअंदाज किया जाने लगा है,अक्सर राजपूत सैन्य अधिकारीयों को हर प्रकार से योग्य और वरिष्ठ होते हुए भी सेनाध्यक्ष,एयर चीफ मार्शल,एडमिरल नही बनाया जाता, पिछले 65 वर्षों में सिर्फ दो आर्मी चीफ जनरल राजेन्द्र सिंह जाडेजा और जनरल वी के सिंह राजपूत बन पाए,सगत सिंह राठौड़,जनरल नाथू सिंह,जनरल हनुतसिंह राठौड़ जैसे शानदार करियर और रिका...

इतिहास का महत्व और क्षत्रियों के गौरवशाली इतिहास को विकृतीकरण से रोकना(IMPORTANCE OF HISTORY)

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======मोदी सरकार से क्षत्रियों की माँग भाग संख्या--3===== किसी भी समाज के लिए इतिहास का महत्व अमूल्य है। इतिहास के बगैर वह राष्ट्र और कौम उन्नति नहीं कर सकती।भारत में इतिहास का विकृतीकरण किया जाता रहा है और इसके दुष्परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं....... इतिहास का क्या महत्व मानव सभ्यता में होता है इस पर कुछ विद्वानों के विचार जानिए----- 1--यदि किसी राष्ट्र को सदैव अधःपतित एवं पराधीन बनाये रखना हो ,तो सबसे अच्छा उपाय यह है कि उसका इतिहास नष्ट कर दिया जाय "।कोई अवनत राष्ट्र अपनी उन्नति करना चाहे ,तो उसे सबसे पहले अपने इतिहास का निर्माण करने की आवश्यकता है। 2-- History is the first thing that should be given to children in order to form their hearts and.understandings .---Rolis 3--इतिहास वह वस्तु है जो बच्चे के हाथ में सबसे पहले ही जानी चाहिए ,क्यों कि उनके कोमल ह्रदयों पर ही देश -प्रेम और वास्तविक बुद्धि की मुहर लग जाती है ।--रोलिस 4--जो जाति अपने पूर्वजों के श्रेष्ठ कार्यों का अभिमान नहीं करती वह कोई ऐसी बात ग्रहण न करेगी जो कि बहुत पीढ़ी पीछे उनकी संतान से सगर्व स्मरण करने योग्य हो।--ल...

===मोदी सरकार से क्षत्रियों की मांग भाग-1===

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जय क्षात्र धर्म----  ===मोदी सरकार से क्षत्रियों की मांग भाग-1=== मित्रों हाल ही में नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि आगामी 09 मई को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी,इस घोषणा से क्षत्रिय समाज में ख़ुशी की लहर है, क्षत्रिय समाज हमेशा से भाजपा की रीढ़ रहा हैँ।क्षत्रिय समाज ने हमेशा से भाजपा को बिना किसी स्वार्थ के समर्थन दिया है जबकि आज तक क्षत्रि योँ को भाजपा से इसके बदले कुछ नहीँ मिला। बल्कि भाजपा और उसकी सरकारोँ ने हमेशा क्षत्रियोँ हित के विरोध में ही काम किया है फिर भी क्षत्रिय कट्टर राष्ट्रवादी होने की वजह से हमेशा भाजपा का समर्थन करता रहा हैँ।इस बार भी केंद्र में मोदी सरकार को लाने में क्षत्रिय समाज का सबसे अहम योगदान हैं। इसलिये मोदी सरकार से क्षत्रियोँ की अपेक्षाए होना अवश्यम्भावी है। लेकिन ये हमे भी पता है की भले ही भाजपा हमारे वोटों से जीते लेकिन वो ग़ुलामी हमेशा उन लोगोँ की करेगी जिनके वोट के लिये उसे हाथ फ़ैलाने पड़ते है और जो निर्मम होकर उससे अपनी मांगे मनवाते है। इस अवसर पर हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक मांगप...

पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाटलैंड नही राजपूत लैंड है (WEST UP IS RAJPUT LAND,NOT JATLAND)

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आम तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बारे में यह माना जाता है कि यहाँ हरियाणा की तरह जाटों का बाहुल्य और वर्चस्व है,इसे जाटों,गूजरों का इलाका माना जाता है मगर यह सच नही है,अगर वर्तमान राजनितिक प्रतिनिधित्व और जनसँख्या का आंकड़ा देखें तो इस इलाके में भी राजपूत जाट,गूजर से बहुत आगे है,इस क्षेत्र को जाटलैंड,गूजरलैंड मानना बहुत बड़ी भूल और मिथक है,आइये देखते हैं कैसे----- =======पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजपूतों की भूमिका========= महाभारत कालीन हस्तिनापुर, ब्रज और पांचाल के क्षेत्र को अपने अंदर समाये हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र प्राचीन काल से ही देश की राजनीति का केंद्र रहा है। प्राचीन काल से ही यह भूमि क्षत्रिय राजवंशो के बीच सत्ता के लिए संघर्ष की गवाह रही है। यह क्षेत्र वर्तमान समय में अपर दोआब (सहारनपुर,मेरठ मंडल),मध्य  दोआब(आगरा,अलीगढ मंडल),पांचाल अथवा रूहेलखंड(मुरादाबाद,बरेली मंडल)में बंटा हुआ है. एतिहासिक प्रष्ठभूमि---------------- मध्यकाल में भी ये क्षेत्र राजनितिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। उस समय की राजनीति के केंद्र कन्नौज और बाद में दिल्ली के बगल में स्थित ह...

47 आईएएस अधिकारीयों वाला राजपूतों का गांव माधो पट्टी(madho patti village of rajputs which has 47 IAS)

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--47 IAS अधिकारी वाला राजपूतों का गांव माधो पट्टी-- जरूर पढ़ें और अधिक से अधिक शेयर करें। आम तौर पर आरक्षण को राजपूत समाज के युवाओं के लिए पैरो की बेड़ियां माना जाता है।लाखों बेरोजगार युवा सिर्फ आरक्षण को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। पर क्या ये पूरा सच है???? जी नहीं ये पूर्ण सत्य नही है।अगर कुरीतियों का त्याग करके कोई समाज सही दिशा में मेहनत करें तो भले ही कितनी भी बेड़ियां और मुश्किलें हमारा रास्ता रोकें पर हमे हमारी मंजिल को पाने से नही रोक सकती। अगर युवा मन लगाकर दिलो जान से परिश्रम करें तो कोई भी लक्ष्य असम्भव नही है। अक्सर राजपूत समाज के युवा अपनी सभी असफलताओं के लिए सिर्फ आरक्षण को जिम्मेदार ठहराते हैं जबकि उनमे से कई अपना लक्ष्य पाने के लिए कोई परिश्रम ही नही करते। वो जरूर पढ़ें और प्रेरणा प्राप्त करें। उत्तरप्रदेश के जौनपुर जिले में सोलंकी (स्वर्णवान सोनवान शाखा) राजपूत बाहुल्य माधोपट्टी एक ऐसा गांव है जहां से कई आईएएस और अफसर हैं। इस गांव में महज 75 घर हैं, लेकिन यहां के 47 आईएएस अधिकारी विभिन्न विभागों में सेवा दे रहे हैं। इस एरिया में सोलंकी राजपूतों के 12 गांव हैं और जौनप...

गुजरात के वीर राजपूत - पार्ट 2 (rajputs of gujrat)

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तुर्क-मुगल-अफगान हमलावरो को खदेड़ने वाले गुजरात के वीर राजपूत - पार्ट 2 🔸 1 ➡  ठाकोर रणमलजी जाडेजा (खीरसरा) - जूनागढ़ के नवाब ने खीरसरा पर दो बार हमला किया लेकिन रणमलजी ने उसे हरा दिया, युद्ध की जीत की याद मे जूनागढ की दो तोपे खीरसरा के गढ़ मे मौजूद हैँ || 2 ➡ राणा वाघोजी झाला (कुवा) - मुस्लिम सुल्तान के खिलाफ बगावत करी, सुल्तान ने खलिल खाँ को भेजा लेकिन वाघोजी ने उसे मार भगाया, तब सुल्तान खुद बडी सेना लेकर आया, वाघोजी रण मे वीरगति को प्राप्त हुए और उनकी रानीयां सती हुई || 3 ➡ राणा श्री विकमातजी || जेठवा (छाया) - खीमोजी के पुत्र विकमातजी द्वितीय ने पोरबंदर को मुगलो से जीत लिया। वहां पर गढ का निर्माण कराया। तब से आज तक पोरबंदर जेठवाओ की गद्दी रही है || 4 ➡ राव रणमल राठोर (ईडर) - जफर खाँ ने ईडर को जीतने के लिये हमला किया लेकिन राव रणमल ने उसे हरा दिया. श्रीधर व्यासने राव रणमल के युद्ध का वर्णन 'रणमल छंद' मे किया है || 5 ➡ तेजमलजी, सारंगजी, वेजरोजी सोलंकी (कालरी) - सुल्तान अहमदशाह ने कालरी पर आक्रमण किया, काफी दिनो तक घेराबंदी चली, खाद्यसामग्री खत्म होने पर सोलंकीओ ने शाका किया, सुल...

जब शरणागत 140 सुमरा-मुस्लिम कन्या को बचाने के लिए जाडेजा राजपुतो ने किया जौहर और शाका...!!!

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--जाम अबड़ाजी जाडेजा--- Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास जब शरणागत 140 सुमरा-मुस्लिम कन्या को बचाने के लिए जाडेजा राजपुतो ने किया जौहर और शाका...!!!          बात हे विक्रम सवंत 1356(ई.स. 1309) की तब गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जाडेजा राजपुतो का राज था |कच्छ के वडसर में जाडेजा राजवी जाम अबडाजी गद्दी पर बिराजमान थे | जाम अबडाजी एक महाधर्मात्मा और वीरपुरुष होने की वजह से उनको “अबडो-अडभंग, अबडो अणनमी” नाम से भी जाना जाता था | उस समय सिंध के उमरकोट में हमीर सुमरा(सुमरा परमार वंश की शाखा थे जो धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गए थे।अब सिंध पाकिस्तान में हैं) जिसको सोरठ के चुडासमा राजवी रा’नवघन ने अपनी मुँह बोली बहेन जासल का अपहरण करने पर मार डाला था, उसके वंश में धोधा और चनसेर नामके दो मुस्लिम-सुमरा शाशक राज करते थे | इन दोनों भाईओ के बिच में आपसी कलह बहुत चलता रहेता था, जिसकी वजह से छोटे भाई चनसेर ने उमरकोट की गद्दी हथियाने के लिए दिल्ली के शाशक अलाउदिन-खिलजी से जाके कहा की “आपके जनान-खाने के लिए अच्छी सी सुन्दर सुमरी कन्या मैंने राखी हुई थी, पर मेरे भाई धो...